![]() |
छत्तीसगढ़ का यह
इलाका पिछले 40 सालों
से नक्सल युद्ध का बैटल फील्ड बना हुआ है इस लड़ाई में एक तरफ हथियारबंद नक्सलवादी
हैं तो उनसे निपटने के लिए दूसरी ओर सरकार ने सिक्योरिटी फोर्सेस को तैनात कर रखा
है इन फोर्सेस की फ्रंट लाइन पर स्थानीय आदिवासी ही हैं जिन्हें बस्तर फाइटर या
डीआरजी डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड के पद पर भर्ती किया जाता है शक्ति साहस और
रणनीति की जरूरत वाले इस ओहदे पर 21वीं सदी में जाकर आधी आबादी को जगह मिली नक्सल
फ्रंट में तो दशकों से महिला कमांडर्स फ्रंट लाइन पर लड़ रही हैं देश की
सिक्योरिटी फोर्सेस में भी सालों से महिलाएं हैं लेकिन सन 2021 में पहली बार
गोरिल्ला वॉर में सरकार की तरफ से वुमेन फोर्स को शामिल किया गया यह महिलाएं अब वो
सारे काम करती हैं जिसे मेंस वर्ल्ड का काम माना जाता था लेकिन सवाल यह है कि
छत्तीसगढ़ की आदिवासी लड़कियों ने इस युद्ध में हथियार लेकर क्यों उतरना चुना
बंदूक उठाना क्या सिर्फ इन लड़कियों के लिए रोजगार का साधन है या कुछ और जब यह घने
जंगलों में ऑपरेशंस पर जाती हैं तो इनके क्या अनुभव होते हैं सरकार ने 2025 में अति नक्सल
प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया है यह लड़कियां ऑपरेशंस में जाती हैं
नक्सलवादियों के खिलाफ जो यहां पर अभियान चलाए जाते हैं उसमें शामिल होती हैं जो
कैंप स्थापित किए जाते हैं जिसके जरिए किसी एरिया को नक्सल फ्री घोषित किया जाता
है उन कैंप्स को बनाने में ये लोग शामिल हैं
हम लोग को नदी मिलता
है नाला मिलता है पगडंडी मिलता है पहाड़ मिलता है जैसे कि पहाड़ में कभी कबभार ऐसा
पहाड़ मिलता है कि हम लोग चढ़ नहीं पाते तो बड्डी को अब सामने वाला चढ़ा ना वो
बड्डी को पकड़ के ऐसे चढ़ना पड़ता है हमको ऐसा जगह मिलता है मतलब ऑपरेशन के दौरान उतना
मतलब जितना बोल रही हूं उतना आसान ना जितना करने में उतना कठिन है जितना आसानी से
बता रही हूं उससे ज्यादा मुश्किल है पार करना है जी जब मैं शुरू में ऑपरेशन गई ना
मेरे को डर लगता था जब फर्स्ट ऑपरेशन कुना डब्बा साइड गए थे हम तो डर के मारे मैं
पूरा पसीना पसीना हो गई थी शुरू
शुरू में डर लगा बाद में धीरे-धीरे डर मिटते गया अब नहीं लगता डर अभी नहीं लगता है
बस्तर पैटर होना बहुत गर्व की बात है मैम हम हम लोग जंगल में कैसे घूमते हैं वो तो
बोलने से आप लोगों को लगेगा लेकिन हम लोग जंगल में बिताते हैं उस चीज को बहुत
तकलीफ होती है जब मैं छोटी थी तब हम उधर पूरा नक्सले हुआ करते थे तो पहले हम लोग
छोटे-छोटे पढ़ रहे थे तब भी हम लोगों को बहुत स्कूल जाते हो क्या बनते हो कैसे
क्या बनोगे ऐसे करके इंटरव्यू पूछते थे नक्सली लोग ऐसे आके तो मैं झूठ बोलती थी
मैं डॉक्टर बनूंगी करके और मैं अभी फोर्स में आ गई हूं अब अभी नहीं आते हैं मेरा
इलाका पूरा साफ हो गया है नक्सली नहीं आते हैं तो जब यहां पहली बार आई थी बस्तर
फाइटर्स ज्वाइन करने तो मम्मी पापा ने क्या बोला था जी मैम मेरे मम्मी पापा को तो
नहीं पता था मैं फॉर्म डाली थी तो सिलेक्शन होने के बाद 15 दिन के बाद मैं
पीटीएस जाने के बाद बता दी मैं मां को झूठ बोल के गई थी मैं खेलने जा रही हूं मेरे
को सर लोग बुलाए हैं खेलने करके तो मैं झूठ बोल के गई थी उसके बाद मां फिर मतलब
गांव वाले दोस्त लोग बोले दोस्त फ्रेंड लोग तो तेरी मां बहुत याद कर रही है करके
बोलने से फिर मां को खोल करके बताई कि मैं पुलिस में भर्ती हो गई हूं करके बाद में
मम्मी बहुत रो रही थी वहां मरने वाला जगह में क्यों गई ये करके नक्सली मार देंगे
अभी घर जाने से भी मम्मी रोते रहते हैं कि मेरी बेटी को कोई मार देगा ऐसेवैसे तो
बोलते हैं हां लेकिन हम लोग ऐसा नहीं सोचते कि हम लोग को नक्सली मार देंगे हम लोग
भी नक्सली लोग को खत्म करने के लिए रास्ता तय किए तो हम लोग सोचते हैं कि ऑपरेशन
करेंगे और नक्सली को जल्द से जल्द खत्म करेंगे फिर अपना इलाका को पूरा क्लियर करके
आराम से अंदर सिटी जगह में ड्यूटी करेंगे यही सोचते हैं अभी नक्सली जल्दी खत्म हो
जाए फिर हम लोगों का भी पूरा बस्तर पूरा इलाका होगा नक्सलवाद अगर खत्म हो जाएगा आप
लोग कैसी तस्वीर देखते हैं अगर मैं तो सोचती हूं
नक्सलवाद खत्म हो
जाएगा जैसे कि अंदर अंदर इलाका है ना उसके गांव में ना बोर है पानी है और खाने
पीने का उतना दूर मार्केट मतलब पहाड़ ऊपर रहते हैं ना हम लोग ऑपरेशन करते हैं आधे
से ज्यादा देखते हैं किसी के घर में ना कपड़ा लाता उधर नहीं रहता एकदम ऐसे रहते
हैं ना रहने का घर ना कुछ डंग नहीं रहता है ऐसा रहते हैं वो लोग पानी भी नाला का
पानी जाता है वहां का लेते हैं और वहां के बच्चे लोग भी कैसे रहते हैं एकदम थोड़ा
कैसे किसी का पेट बड़ा किसी का मुंडी एकदम पूरा बीमारी से ऐसा टाइप का रहते हैं उन
लोग दूर हम लोग ऑपरेशन जाते हैं तो उन लोग पूछते हैं बेटा टेबलेट वगैरह लाए हो
क्या दर्द वाला यह दे दो आंटी लोग वगैरह पूछते हैं तो हम लोग अगर रखे रहते हैं तो
दे देते हैं उन लोग को देख के बहुत तकलीफ होता है हम लोग चाहते हैं कि नक्सलवाद
अगर जल्दी खत्म होगा तो उधर भी सुविधा होगा तो कि हम लोग इधर थोड़ा सुमा जिला में
सिटी टाइप का रहने लग गया तो वैसे उधर भी रहेगा तो हम लोग को अच्छा होगा वहां तो
ऐसे कोई पढ़े लिखे है ही नहीं स्कूल नहीं है कुछ नहीं है उन लोग को तो यह जानकारी
भी नहीं पता है कि ये खाने का चीज है कि नहीं है नहीं खाने का भी चीज है उन लोग को
नहीं पता ना उतना मैम तो देखते हैं ना हम लोग को अच्छा नहीं लगता तो हम लोग भी
चाहते हैं कि नक्सली जल्दी खत्म हो जाए तो फिर उधर पूरा सुविधा अच्छा रहेगा तो उन लोग
भी अच्छा जीवन यापन करेंगे आप आपने बचपन में नक्सलवाद के कारण क्या-क्या समस्याएं
देखी अपने गांव में आप आप कैसे याद करते हो मेरे गांव में तो दो बार नक्सली नक्सली
लोग आए थे मैम मैं छोटी थी पांचवी पढ़ रही थी तब 2015 में आते थे नक्सली मैं 2015 16 में पांचवी पढ़ी ऐसा
कुछ है तो वो लोग गांव में दो बार आए थे तो स्कूल पढ़ने वाले लोगों को भी मीटिंग
में बुलाए थे गांव वाले तो गांव के समस्या के कारण हम लोगों को भी जाना पड़ा था तो
गए थे तब मेरे को पूछे नक्सली एक जानकी नाम की थी वहां की कमांडर हम लोगों को भी
नाम आता था ये जानकी दीदी जानकी दीदी करके वहां गाना वना गाते थे तो हम लोग छोटे
बच्चे लोग को भी पता था उसका नाम तो मेरे को पूछी थी तू क्या बनेगी पढ़ रही है
करके तो मैं बोली डॉक्टर बनूंगी मेरी मां पहले से बताई थी अगर तू कुछ बनना चाहेगी
तो ऐसे डॉक्टर लोग डॉक्टर बनूंगी ऐसा कुछ बोलना उन लोगों को झूठ बोलना करके मां
बता दी थी तो मैं वैसेवैसे बताई उसको कि मैं डॉक्टर बनूंगी लेकिन असल में क्या
बनना चाहती थी मैं असल में वर्दी पहनना चाहती थी मैं क्यों मेरे को अच्छा लगता था
देश का सेवा देश का सेवा करूंगी ऐसे सोचती थी मैं जैसे विभाग में नहीं आने के पहले
भी मैं बनना ही चाहती थी मेरा सपना पूरा हो गया बस मैं यही चाहती थी पढ़ने के बाद
पहले भी सोचती थी कि मैं पढूंगी और पुलिस बनूंगी फिर भी और अब जब इतने संघर्ष है
यहां आकर तो अच्छा ही मैम अच्छा ही लगता है आदत हो गया है अच्छा ही लगता है मैं मन
में आई हूं मेरे तजुर्बा में आई तो इस चीज को करूंगी ना मैम तो मेरे को अच्छा ही
कोई भी दिक्कत परेशानी है जी मैं कर लूंगी जब 3 दिन का एलओपी जाते हैं तो फिर 5 किलो का वजन ले जाते
हैं 5 से 6 किलो हो जाता है
राइफल 10 किलो हो जाता है
बहुत सारा कुछ ऐसे बैग में पकड़ के जाते हैं तीन-चार दिन बारिश कपड़ा बनाने के लिए
गंजी बर्तन सब कुछ अपन खुद लेके जाते हैं फिर अब सब कुछ आपके बैग में अभी है मैम
मैं नहीं दिखा है
मुझे दिखाओगी
क्या-क्या है आपके बैग में मैं दिखा सकूंगी ऐसे ना जो बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज होते
हैं उनका वो चलता है व्हाट्स इन माय बैग मतलब मेरे बैग में क्या-क्या है आइए मैं
दिखाती हूं ये बकायदा वीडियो बनते हैं इसके आप लोग YouTube पे वीडियो वगैरह
देखते हो देखते हैं तो आज हम हिडमे के साथ कर रहे हैं कि व्हाट्स इन हड बैग हिडमे
के बैग में क्या-क्या है ये सब्जी बनाने का कढ़ाई है एक-एक करके मैं नीचे रखते
जाऊंगी देते जाओ फिर ये देखने और अगर मैम को बहुत ज्यादा दिक्कत होता है ना एक
जोड़ी कपड़ा भी कपड़े रहते हैं अलग से अच्छा पसीना से परेशान हो जाते हैं तीन दिन
का एलओपी जाते हैं तो कपड़ा भी रखे रहते हैं ये बड़ा बोतल है यहां 4 लीटर है पानी हां 4 लीटर पानी है और फिर
ये 3 लीटर 6 लीटर हुआ ये पानी
भरा ये आधा लीटर हो गया थोड़ा सा अब बस बाहर में रखे हैं पीते-पीते जाने के लिए
अच्छा जी उसके बाद एक सम्मज रखे हैं खाना बनाने के लिए जी फिर ये बिछा के ये दोनों
दोनों जगह यूज़ होता है ये बारिश आते समय हम लोग ओढ़ भी लेते हैं और कहीं थोड़ा अलर्ट
करने के लिए बिछा के इसको आराम करते हैं रात को सोते समय भी इसको बिछा के इसी पे
ही बिछा के सोते हैं जी यही आप लोग का बेड यही आप लोग का गद्दा होता है जी बारिश
में इसके बाद फिर राशन पानी तो अभी एक प्लास्टिक का और सामान और ठंड लगती है तो ये
देख बेडशीट पकड़ पकड़े रहते हैं हम मुझे दे दो मैं हाथ में पकड़ लेती हूं इसके बाद
यहां साबुन है ये ये नक्सली साबुन है ये नक्सली मिला है तो हम लोग इसको यूज़ इसको
इसको यूज़ कर रहे हैं दिखाओ ना ये नक्सली रखते हैं ऐसा साबुन हम लोगों को मिला है
जंगल में ये देख ये देख तो इसको आप ले आए हां ले आए हैं कहां मिला आपको कौन से
ऑपरेशन में गई ये स्पेशल पार स्पेशल पार ऑपरेशन में गया फिर वहां क्या नक्सलियों
को मारा भी था एक बॉडी मार के लाए थे एक बॉडी एक बॉडी एसटीएफ वाले मारे थे जॉइंट
ऑपरेशन हुआ था तब तो ये आपको सामान मिला तो आप ले आई ये दवाई है ये हम लोगों का ओ
आर एस है ये आर एस है ये रस्सी है बारिश होता है तो इसको हम लोग थोड़ा सा वो टेंट
बनाते हैं ईजीली में बनाते हैं टेंटपर के लिए सोते समय उसके लिए और यह खाने का जो
हम लोग जंगल में कैसे बना के खाते हैं वह सब ऐसे रखे रहते हैं झिल्ली में बांध के
ऐसे ये दही है
ये बड़ी ये नमक ये
नमक ये टमाटर बड़ी ये दही गर्मी से बचने के लिए रखे रहते हैं ऐसे में और मिर्ची
पाउडर ये कच्चा मिर्ची ये इमली कट्टा हमारे बस्तर का ये इसको खाते हैं ये कर इसको
डाल के बनाते हैं ना तो तीन दिन चलता है खराब नहीं होता है कैसे इमली को डाल के
पानी में पानी में घोल के इसको में डाल के चावल को बनाते हैं इमली इमली चारू बोलते
हैं इमली चारू बोलते हैं जी ये दो दिन का राशन है ये हां मिलता है यहां पे सब
अपना-अपना राशन लेके जाते हैं सबके बैग में अपना-अपना राशन होता है जी तो इसको दो
या तीन दिन जंगल में बचा बचा के खाना पड़ता है तो खाना को वेस्ट नहीं किया जाता है
थोड़ा सा पका चावल अगर इतना ही रहेगा ना तो इसको चार दिन भी खा सकते हैं हम लोग
चार टाइम खाना खराब होते रहेगा ना चावल दिल्ली में रहेगा उसको हम लोग पानी डालते
हैं उसमें पानी डालते हैं थोड़ा सा नमक डाल के लेते हैं उसके बाद नमक मिर्ची डाल
के खा लेते हैं खा लेते हैं खराब होने पके हुए चावल को मतलब पका हुआ चावल को लेके
जाते हैं दो दिन हो जाता है खराब होने का रहता है उसमें वो टाइप का लगता रहता है
पानी डाल के नमक उसको धोते हैं जैसे बासी बात बोलते हैं ना मैम ऐसे करके खा देते
हैं ये ये हमारा पर्सनल सामान रहता है ऐसा अच्छा सेरी नैपकिन भी लेकर चलते हैं जी
ये देखिए रहते हैं तो जब दर्द होता है क्रैंप्स होता है तब भी ऑपरेशन में है तो
हैं है मैम तो उसमें अब वापस नहीं आ सकते हैं वापस जाऊंगी बोलने बीच जंगल से मैं
अकेले कैसे कैंप तक वापस आ जाऊंगी तो दर्द जेल के भी घूमूंगी पास में कैंप रहता है
अगर ऐसा प्रॉब्लम है बोलने से कमांडर को बोलने से पास में छोड़ नहीं देता अगर दूर
में होगा तो रिटर्न नहीं ला पाएंगे तो अपन को कष्ट करना पड़ता है ऐसी प्रॉब्लम्स
हमें भी पीरियड्स में भी पीरियड्स में भी और पूरा सामान लेके जाते हैं हम लोग मतलब
पीरियड्स में मतलब करते हैं तो हम लोग को एक्सपीरियंस हो गया और हम लोग मतलब
कंफर्टेबल है कर सकते हैं तो पीरियड्स बाधा नहीं है नहीं हमारे लिए नहीं है मतलब
पहले लगता था अभी कंटिन्यू करते हैं ना तो नहीं लगता है पानी की जब जरूरत होती है
जैसे नालावला रहता है पानी रहता है तो हम लोग कमांडर को बोल देने से वहां रोक देते
हैं तो हम लोग को लिए थोड़ा देखरेख करते रहते हैं तब हम लोग चेंज कर लेते हैं फिर
उसके बाद वो जाने से बोल फिर लेके जाते चेंज करते हैं जैसे ये तो पूरा जंगल का
इलाका है
नदी आ गई नदी आएगा
नाली टाइप का तो जैसे कि हमारे साथ वाले टीम वाले थोड़ा दूर रहेंगे उसके बाद हम
लोग तीन चार लोग जाएंगे दो-तीन लोग मतलब आड़ लेके बैठे रहेंगे तो अपन उधर चेंज कर
लेंगे अच्छा जी खुले में हां अब खुले में करना ही पड़ेगा मैम कैसे करोगे अब ऑपरेशन
जा रहे हैं तो हमें करना पड़ेगा यहां फिर हम लोग पानी बोतल को रखे रहते हैं फिर वो
शॉपी को निकाल के झिल्ली में डाल के फिर ऐसे ही लेके आते हैं या फिर जहां अच्छा
पानी वगैरह रहता है वहां पे हम लोग धो के फेंक देते हैं मुझे तो सोच के ही बहुत
हैरानी हो रही है घर वालों को बताती हूं तो घर वाले क्या पूछते हैं ये सारे सवाल
जैसे मैं पूछ रही हूं हां घर वाले पूछते हैं पर मेरे घर में ऐसे है कि मेरी मां
मतलब मेरे से बहुत ज्यादा प्यार करती है तो मैं मम्मी को ना कि ऑपरेशन जाती हूं
ऐसा-सा परेशान करती हूं मैं मम्मी को नहीं बताती हूं मम्मी को मतलब बहुत दर्द फील
होता है मम्मी को तो मैं नहीं बताती हूं क्या बताती हो मम्मी को कि मम्मी अच्छा
काम है हां अच्छा काम है मैं अच्छा करती हूं नहीं तो मेरी मां एक टाइम बताई थी मैं
मम्मी को ऐसा-ऐसा होता है तो मम्मी बोली थी नौकरी छोड़ देना रिटर्न आना तो मेरे घर
में कोई जॉब करने वाले नहीं है तो मेरे भाई बहन छोटे-छोटे हैं और मैं घर से बड़ी
हूं तो मेरे को जॉब करना ही पड़ेगा ये करके मैं अपने आप को ठान ली हूं और मैं ये
जॉब कर रही हूं घर वाले को भी देखरेख करना है तो करना ही पड़ेगा करके मैं मां को
यह सब नहीं बताती हूं किसी को अपनी दर्द तकलीफ नहीं बताती हूं नहीं खासकर मां को
घर वाले को नहीं बताती हूं अपने फ्रेंड्स वगैरह को ऐसे शेयर कर सकते हैं मेरे घर
वाले अभी भी चाहते हैं छोड़ दे करके पर मैं नहीं करती क्यों लेकिन मतलब लोग तो
कहते हैं कि माओवादी भी जबरदस्ती हथियार पकड़ाते हैं और इधर बस्तर में भी देखो
बस्तर फाइटर्स या दुर्गा फाइटर्स या दंतेवाड़ी फाइटर्स कुछ भी करके आदिवासियों को
हथियार ही पकड़ा रहे हैं आप कैसे देखते हो इस बात को वो लोगों के ऊपर दबाव डाल के
हथियार दे रहे हैं पर हम लोग अपने मर्जी से आए अच्छा ये आप लोग का है और ये हमारा
है हम कौन से गांव से हो चीतल नार ये पूल थाना के अंतर्गत आता है सुमा में ही
पड़ता है सुमा में ही पड़ता है जी अच्छा तो मैं तुम्हें पिंकी बुला लेती हूं चलेगा
इनको बदला हुआ नाम इसलिए बता रहे हैं और पिंकी का चेहरा इसलिए नहीं दिखा रहे हैं
क्योंकि वह एक ऐसे इलाके से आती है जो अभी भी बहुत ज्यादा नक्सल प्रभावित है उनके
गांव में अभी भी माओवादी आते हैं उनका प्रेजेंस वहां पर है तो उनको डर है कि उनकी
वजह से कहीं परिवार वालों को कुछ ना हो दिक्कत ना हो जी जब इसमें नहीं लगी थी उससे
पहले ही मम्मी सबको मोटिवेट करती थी या सबको प्रोत्साहित करती थी कि पढ़ाई करना
चाहिए सब अच्छे नौकरी लगते हैं ये सब लेकिन सब उनके अपोज उनका ऑोजिशन कर रहे थे कि
नहीं करना है यह सब करके तो इसलिए नक्सलवादी हम लोग को वहां से निकाल दिए घर गांव
से गांव से ही निकाल गांव से ही निकाल दिए तो हमारी नानी के घर में हम लोग रहते
हैं और वहां से मम्मी 15 किमी
लेदा करके गांव है लेदा से चीतल नार जाते हैं
15 किमी पड़ता है तो डेली का 30 किमी आनााना हो जाता
है कैसे जाती है मम्मी स्कूटी से खुद चलाकर अकेले हां खुद चला के वरना गांव वाले
से किसी से बातचीत सिर्फ जाएगी वहां आंगनबाड़ी अपने बच्चों को पढ़ाएगी जो काम है
वहां करेंगे सर्वे वगैरह जो रहता है वीक में एक बार वो सर्वे करके फिर वापस आ जाते
हैं शाम तक उनको भी डर रहता है लेकिन अब थोड़ा मीटिंग वगैरह बात वगैरह किए हैं कि
मैं कुछ नहीं बोलूंगी कुछ नहीं करूंगी बस जाऊंगी ड्यूटी करूंगी और वापस आ जाऊंगी
बोल के तो उन लोग भी शांत हैं अब कुछ नहीं करते मम्मी को पहले था मम्मी को मीटिंग
ले जाते थे भैया को ले जाते थे मारपीट हुआ बहुत फिर छोड़ दिया फिर आप कैसे आई
बस्तर फाइट है इसमें मैं जस्ट 12th क्लियर
की थी और कॉलेज कर रही थी फर्स्ट ईयर तो मुझे पता चला कि नहीं वैकेंसी निकला है और
घर पे उस टाइम भैया भी बस ड्राइविंग करते थे गाड़ी चलाते थे उतना सोर्स ऑफ इनकम
नहीं था हमारे घर पे तो मैं बोली मैं भी कोशिश करती हूं शायद किस्मत में होगा तो
हो जाएगा तो गांव में फिर नहीं बताया कि डाले हैं करके फिजिकल यहां दी यहीं पर इसी
ग्राउंड पे फिजिकल हुआ फिजिकल पास की इंटरव्यू हुआ उसके बाद फिर धीरे से गांव में
पता चला कि हुआ है करके तो उन लोग बोले आपको भी खतरा है आपके बच्चों को भी खतरा अब
उनको आने ही नहीं दो करके पहले एक दो बार गर्मी छुट्टी में जाया करती थी गांव घर
देखने के लिए लेकिन अब पूरा ही बंद हो गया अब नहीं जाती मम्मी को जान को खतरा हो
जाएगा करके कुछ नहीं करती अब घर भी नहीं जाती हूं घर कभी-कभी मम्मी आते हैं सुमा में
तो मिलते हैं नहीं तो कभी-कभी छुट्टी लेती हूं तो थोड़ी देर के लिए चली जाती हूं
एक-द दिन फिर आ जाती हूं डायरेक्ट घर जाने से फिर कहीं बाहर नहीं निकलती डर लगता
है घर याद आता है बहुत याद आता है लेकिन मजबूरियां हैं शौक से भी करें कि नहीं
चाहत था कि करते हैं और किस्मत में था तो फर्स्ट ट्राई में लग गया लेकिन अब प्रभाव
धीरे-धीरे कम हो रहा है कम हो रहा है हां तो नक्सलवाद जब कम हो रहा है तो उससे
क्या बेहतरी हो रही है कुछ बेहतर हो भी रहा है या अभी कुछ नहीं हो रहा हो रहा है
लगता है क्योंकि जो पहले जनसंख्या थी
हमारे जैसे गांव में
अगर 500 600 लोग हैं तो उसमें
अगर 50 लोग भी जा रहे हैं
कि नहीं हमारी तरफ आ जाओ या छीन के भी ले जा रहे हैं तो बचपना से एज अ टीनएज बोलते
हैं जो सिखाओगे वो सीख जाएंगे तो वैसे सिखा के उनको अपने साइड कर लिए लेकिन अब जब
उनके खानदान वाले बाहर जाके पढ़ रहे हैं सब पता चल रहा है तो वो अपने बच्चों को कम
भेज रहे हैं उधर उनको जाने नहीं दे रहे हैं या तो उनको गांव से कहीं बाहर रख के
पढ़ा रहे हैं तो अब वो सब कम हो रहा है तो नहीं धीरे-धीरे हां क्या भविष्य देखती
हो क्या चाहती हो बस्तर के लिए कैसे बस्तर का सपना देखती हो नक्सल फ्री हो जाए
डेवलपमेंट आ जाए यहां के लोग शिक्षित हो जाए क्योंकि बस्तर बोलने से एकदम अशिक्षित
सोचते हैं लोग अशिक्षित और नक्सल प्र क्षेत्र तो ये दो चीज हो जाएगा तो बस्तर
डेवलपमेंट ज्यादा हो जाएगा मतलब शिक्षा हो जाएगी और नक्सल का प्रभाव कम हो जाएगा
तो बस्तर अपने आप डेवलप हो जाएगा हो जाएगा डेवलप क्योंकि यहां बच्चे बहुत टैलेंटेड
है बस सोर्स नहीं है अंदर-अंदर के गांव जैसे अभी ये सब आए हैं अंदर से आए हैं और
हमारे भर्ती में भी इतना छूट था कि हाइट का छूट ये सब था तो सब आ गए तो सबको पता
है अपने प्रॉपर इलाके से आए हैं ना तो हमको अपना नॉलेज है कि इधर ऐसा है वैसा है
तो हम बताते हैं यहां तो हिसाब से होता है कैंप भी खुलता है तो यहां ये दिक्कत है
वो दिक्कत है तो ये लेखक और इतिहासकार अशोक कुमार पांडे ने कभी लिखा कि हर चूल्हे
में आग रहे और आग लगे बंदूकों को शायद यही सपना बस्तर का हर आदिवासी छत्तीसगढ़ का
हर आदिवासी देखता है कि यह जो बंदूक इन्होंने उठा रखी है ये जल्दी इनके हाथ से
छूटे और एक ऐसा बस्तर हो जहां पर उनकी पहचान नक्सलवाद या अशिक्षा से ना जुड़ी हो
बल्कि जो इनके अपने स्किल्स है अपना टैलेंट है जो इनका अपना जीवन है जो एक आम
आदिवासी का जीवन होता है उससे जुड़ी हुई रह जाए आज जो ये लड़की अपने घर से लड़कर
अपने समाज से लड़कर इन फर्सेस में आई है इन फर्सेस का मकसद पूरा हो जो यह नक्सलवाद
को खत्म करने का सपना देखती हैं वह सपना पूरा हो और जल्द यह अपने अगले लक्ष्य की
तरफ बढ़ें इसी उम्मीद के साथ इस रिपोर्ट को हम यहां खत्म करते हैं

0 Comments